जिले में नरवाई जलाना प्रतिबंधित

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जिले में नरवाई जलाना प्रतिबंधित

उज्जैन 24 मार्च। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि श्री आरपीएस नायक से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के किसान भाईयों से अपील की जाती है कि गेहूं और अन्य फसलों को काटने के बाद बचे हुए फसल अवशेष (नरवाई) जलाना खेती के लिये आत्मघाती कदम है। वर्तमान में जिले में लगभग गेहूं फसल की कटाई प्रारम्भ हो गई है। कटाई के पश्चात सामान्य तौर पर किसान भाई नरवाई में आग लगा देते हैं। इससे पर्यावरण में प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होती है। उक्त निर्देशों के उल्लंघन किये जान पर सम्बन्धित व्यक्ति/निकाय को नोटिफिकेशन प्रावधान तथा निर्देश अनुसार दो एकड़ से कम भूमि रखने वाले को ढाई हजार रुपये प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि, दो एकड़ से अधिक किन्तु पांच एकड़ से कम भूमि रखने वाले को पांच हजार रुपये प्रति घटना, पांच एकड़ से अधिक भूमि रखने वाले को 15 हजार रुपये प्रति घटना पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि देय होगी।

कंबाईन हार्वेस्टर से कटाई के उपरांत फसल अवशेषों में आग लगाने की घटनाओं को देखते हुए रबी की कटाई में कंबाईन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम या ट्रॉ रिपर का उपयोग करके फसल अवशेषों से भूसा प्राप्त किया जा सकता है।

गेहूं एवं अन्य फसलों के कृषि अपशिष्टों को जलाने से होने वाली हानियां

खेत में गेहूं एवं अन्य फसलों के कृषि अपशिष्ट (नरवाई) जलाने से भूमि में उपलब्ध जैव विविधता समाप्त हो जाती है। इसमें उपस्थित सूक्ष्म जीव जलकर नष्ट हो जाते हैं। सूक्ष्म जीवों के नष्ट होने के कारण जैविक खाद का निर्माण बन्द हो जाता है। भूमि की ऊपरी परत में ही पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध रहते हैं। आग लगाने के कारण पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं। भूमि कठोर हो जाती है, जिसके कारण इसकी जलधारण क्षमता कम हो जाती है और फसलें सूखती हैं। खेत की सीमा पर लगे पेड़-पौधे (फल, वृक्ष आदि) जलकर नष्ट हो जाते हैं। पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है। वातावरण के तापमान में वृद्धि होती है, जिससे धरती गर्म होती है। कार्बन से नाइट्रोजन तथा फास्फोरस का अनुपात कम हो जाता है। केंचुए नष्ट हो जाते हैं। इस कारण भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। इसके अलावा नरवाई जलाने से जन-धन की हानि होती है। उपरोक्त नुकसान से बचने के लिये किसान भाई नरवाई में आग न लगायें।

नरवाई जलाने की अपेक्षा अवशेषों और डंठलों को एकत्रित कर जैविक खाद जैसे भू-नाडेप, वर्मी कम्पोस्ट आदि बनाने में उपयोग किया जाये तो वे बहुत जल्दी सड़कर पोषक तत्वों से भरपूर कृषक स्वयं जैविक खाद बना सकते हैं।

खेत में कल्टीवेटर, रोटावेटर, डिस्कहैरो आदि की सहायता से फसल अवशेषों को भूमि में मिलाने से आने वाली फसलों में जीवांश खाद की बचत की जा सकती है। पशुओं के लिये भूसा और खेत के लिये बहुमूल्य पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ने के साथ मिट्टी की संरचना को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। कंबाईन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम को सामान्य हार्वेस्टर से गेहूं कटवाने के स्थान पर स्ट्रॉ रिपर एवं हार्वेस्टर का प्रयोग किया जा सकता है। नरवाई में आग लगाने पर पुलिस द्वारा प्रकरण भी कायम किया जा सकता है।

क्रमांक 0916​​​​​​ अनिकेत/जोशी

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